भारतीय वायुसेना का मेंटिनेंस कमांड का खास मुख्यालय नागपुर


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    भारतीय वायुसेना का मेंटिनेंस कमांड का खास मुख्यालय नागपुर
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नागपुर : भारतीय वायुसेना पूरी दुनिया के उन कुछ वायु सेनाओं में से एक है, जिनसे दुनिया के अन्य देश थर्राते हैं। भारतीय वायुसेना ने युद्ध के मैदान में और मैदान के बाहर स्वयं की अभूतपूर्व क्षमता को सिद्ध किया है। भारतीय वायु सेना अत्याधुनिक, आक्रामक और दुनिया की सबसे मजबूत वायुसेना है। हालांकि भारतीय वायुसेना के जाबांजों का दुनिया में कोई सानी नहीं है। भारतीय वायुसेना की स्थापना, ब्रिटिश इंडिया काल में ब्रिटेन की रायल एयर फोर्स के सहायक वायु-बल के रूप में, इंडियन एयर फोर्स ऐक्ट 1932 अंतर्गत, 1 अप्रैल 1933 को हुई थी। उसी वर्ष 8 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना को रॉयल एयर फोर्स का यूनिफार्म, बैज, शौर्य प्रतीक और प्रतीकचिह्न प्राप्त हुआ। अप्रैल में भारतीय वायुसेना के प्रथम स्क्वाड्रन का गठन हुआ, जिसमें चार वेस्टलैण्ड वैपिती विमानों का समावेश था। इस स्क्वाड्रन में पांच पाइलेट, फ्लाइट लेफ्टिनेंट, जो बाद में एयरवाइस मार्शल बने, सेसिल बाउचर के कमांड में नियुक्त किए गए। 1938 तक भारतीय वायुसेना का मात्र एक ही स्क्वाड्रन रहा, यद्यपि इसमें 2 अन्य लड़ाकू विमानों को सेवा से जोड़ा गया।

3 सितंबर, 1942 को हरजिंदर सिंह वायुसेना के पहले तकनीकी अधिकारी बने : मेंटिनेंस कमांड की विभिन्न प्रकार की इकाइयां हैं, जो आईएएफ के उद्देश्य को पूरा करने के लिए रखरखाव, रसद आदि देखते हैं। दिलचस्प है कि रखरखाव कमांड के लिए एक महत्वपूर्ण इकाई मेंटिनेंस यूनिट है, जो मुख्यालय रखरखाव कमान के कर्मचारियों को प्रशासनिक सहायता प्रदान करता है। 1966 में जब यह महसूस किया गया कि, मुख्यालय की सीधी जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। तब 1966 में एक अतिरिक्त यूनिट बनाई गई जिसे एमसीयू नाम दिया गया। इसके प्रमुख बने विंग कमांडर के.बी डेखे। वे पहले कमांडिंग अफसर के रूप में शामिल हुए। वहीं 3 सितंबर, 1942 को हरजिंदर िसंह को कमीशन से सम्मानित किया गया और वे वायुसेना के पहले तकनीकी अधिकारी बने। दो साल बाद, उन्हें उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण के लिए ब्रिटेन भेजा गया। वहां से जो रिपोर्ट आई वो ये थी की, रिपोर्ट में इंडियन इंजीनियरिंग ऑफिसर कोकोर्स की जरूरत नहीं है।

मेंटिनेंस कमांड यूनिट की अहम भूमिका

मेंटिनेंस कमांड के कार्यक्षेत्र में कई इकाइयां शामिल हैं, इसमें लॉजिस्टक व सपोर्ट फंक्शन हैं। इनमें से एक वह यूनिट है जो प्रशासनिक सहयोग देती है, ये बहुत महत्वपूर्ण है। बाद में इसे 1966 में एक अतिरिक्त यूनिट,जिसे मेंटिनेंस कमांड यूनिट का नाम दिया गया, का गठन हुआ। यह नागपुर के वायुसेना नगर में स्थित है। हेडक्वार्टर मेंटिनेंस कमांड नागपुर में ही है। ये भारतीय वायुसेना के एक अन्य विभाग का मेंटिनेंस विभाग है, जिसका शुभारंभ ग्रुप कैप्टन हरजिन्दर सिंह की नियुक्ति से हुआ था। ये भी उल्लेखनीय है िक, स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत भारतीय वायुसेना पाकिस्तान से चार युद्ध और पांचवां पीपुल्स रिपब्लिक आफ चाइना से लड़ चुकी है। भारतीय वायुसेना के अन्य अभियानों में गोवा हस्तक्षेप के खिलाफ विजय अभियान में भाग लिया। फिर आपरेशन मेघदूत कैक्टस को सफलतापूर्वक पूरा किया। युद्धों के अलावा भारतीय वायुसेना ने संयुक्त राष्ट्र के पीस कीपिंग अभियानों में भारतीय वायुसेना का अहम रोल रहा है। भारतीय वायुसेना आज सीमा रक्षा के साथ-साथ, प्राकृतिक आपदाओं में राहत का महत्वपूर्ण कार्य करती है। भारतीय वायुसेना अपने स्थापना दिवस पर अनेक कार्यक्रमों का आयोजन करती है, जिसमें मिग 21,मिग 29, जगुआर, मिराज 2000 और सुखोई 30 के साथ एमकेआई हेलिकाप्टरों का कार्य-प्रदर्शन करती है। संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में वायुसेना की सक्रिय भागीदार रही है। इसकी जिम्मेदारी भारतीय क्षेत्र को सभी जोखिमों से बचाने और प्रभावित इलाकों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता प्रदान करने की है।



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