आंगनवाड़ी व आशा वर्करो का १७ को आंदोलन


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    आंगनवाड़ी व आशा वर्करो का १७ को आंदोलन
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नागपुर : सरकार की तरफ से किए गए वादे पूरे नहीं होने से आंगनवाड़ी सेविकाएं नाराज हैं आैर आनेवाले 17 जनवरी को नागपुर सहित देश भर में बंद का ऐलान आंगनवाड़ी सेविका संगठन ने किया है, जिसके लिए आंगनवाड़ी व आशा वर्करों का आंदोलन किया जाएगा I पिछले कुछ महीनो में नागपुर से शुरू हुई आंगनवाड़ी सेविकाआें की लड़ाई अब देश भर में फैलती जा रही है। पिछले साल 26 दिन चले आंगनवाड़ी सेविकाआें के आंदोलन को समाप्त करने के लिए खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आगे आए थे, तीन महीने बीत गए, किन्तु मानधन नहीं बढ़ा, न भाऊबीज की बढ़ी हुई राशि मिली उन्हें । इस आंगनवाड़ी व आशा वर्करों की प्रस्तावित हड़ताल में 11 श्रम संगठनों ने शामिल होने का ऐलान किया है। इसी दिन मंडी हाउस दिल्ली से रैली निकली जाएगी, जो संसद भवन तक जाएगी।

वर्तमान में आंगनवाड़ी सेविका को प्रति माह 5 हजार व मददनीस को 2500 रुपए मानधन दिया जाता है, जिससे की मानधन बढ़ाने की मांग काफी पुरानी है। भाजपा जब विपक्ष में थी, तब इनकी मांगों का खुलकर समर्थन करती थी। मानधन बढ़ाने की मांग को लेकर आंगनवाड़ी सेविकाआें ने पिछले साल 11 सितंबर से 6 अक्टूबर (26 दिन) तक पूरे महाराष्ट्र में आंगनवाड़ी बंद रखी तब  नागपुर से शुरू हुआ संघर्ष मुंबई तक पहुंचा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आगे आकर हड़ताल खत्म कराई थी। आंदोलनकारियों की मांगों को मानने का आश्वासन सरकार की तरफ से दिया गया था। सेविकाआें के मानधन में तुरंत 1500 रुपए व मददनीस की मानधन में 1000 रुपए की वृद्धि करने आैर भाऊबीज की राशि एक हजार से बढ़ाकर दो हजार करने का निर्णय लिया गया था। साथ ही बजट सत्र के पहले बैठक लेकर मानधन में स्थाई वृद्धि करने का भरोसा दिया गया था किन्तु तीन महीने बीत गए, लेकिन न मानधन बढ़ा, न भाऊबीज की बढ़ी हुई राशि मिली। आंगनवाड़ी सेविका व मददनीसों ने आशा वर्करों व शालेय पोषण आहार की आपूर्ति करने वालों के साथ हड़ताल करने का निर्णय लिया है। आशा वर्करों को फिलहाल प्रति केस पर मानधन मिलता है। इनकी मांग हर महीने निश्चित मानधन देने की है। इसी तरह शालेय पोषण आहार पहुंचाने वाले कमिशन बढ़ाने से लेकर हर महीने बिल का भुगतान करने की मांग कर रहे हैं। देश भर के 11 श्रम संगठनों ने इन्हें अपना समर्थन जाहिर करते हुए आंदोलन में शामिल होने का निर्णय लिया है। 

आंगनवाड़ी व आशा वर्करों की श्रम संगठनों की मांग है की 10 हजार रुपए सेविका को और 7 हजार रुपए मददनीस को मानधन दिया जाए । भाऊबीज के दो हजार रुपए मिलने चाहिए। सरकार ने झूठा वादा कर आंदोलन खत्म कराया था। सीटू के नागपुर जिलाध्यक्ष मधुकर भरणे ने कहा कि 17 जनवरी के आंदोलन में सीटू, इंटक, आयटक सहित 11 श्रम संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। नागपुर सहित देश भर में जिला स्तर पर आंदोलन होगा। इसी दिन मंडी हाउस दिल्ली से मार्च निकल कर संसद तक जाएगा। सरकार अगर गंभीर है, तो तुरंत इस बारे में जीआर जारी करे। केंद्रीय महिला व बाल विकास मंत्री मेनका गांधी को मांगों का निवेदन दिया जाएगा।



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